Tuesday, November 6, 2018

मुस्कराइए कि आप लखनऊ में हैं... लेकिन वजह कोई मिलती नहीं

कभी चारबाग स्टेशन के मुख्य द्वार पर एक जुमला लिखा रहता था- मुस्कराइए कि आप लखनऊ में हैं। लेकिन चंद होटलों को छोड़कर अब न तो यह जुमला कहीं लिखा मिलता है और न मुस्कराने की वजह।

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