Tuesday, July 26, 2016

Apple से 27 गुना बड़ी रही Yahoo 6 गलतियों से हुई बिकने पर मजबूर

16 साल पहले एप्पल से करीब 27 गुना ज्यादा मार्केट कैप वाली कंपनी याहू आज बिक गई। इसे अमेरिकी कंपनी वेराइजन कम्‍युनि‍केशन्स ने 32 हजार करोड़ रुपए (483 करोड़ डॉलर) में खरीदा है। बता दें, जनवरी 2000 में याहू दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी थी। तब कंपनी की मार्केट कैप 5.63 लाख करोड़ रुपए (12800 करोड़ डॉलर) थी, जो अब तक सबसे ज्यादा है। 22 साल पुरानी याहू जितने में बिकी है, वो अमाउंट कंपनी के 16 साल पहले की मार्केट कैप के 4% से भी कम है। 16 साल में उलट गई याहू की दुनिया...


- 16 साल पहले याहू की मार्केट कैप 5.63 लाख करोड़ रुपए (12800 करोड़ डॉलर) और एप्पल की 21120 करोड़ रुपए (480 करोड़ डॉलर) थी। ऐसे में, 2000 में याहू की मार्केट कैप एप्पल से 27 गुना ज्यादा थी।
- तब याहू दुनिया की नंबर 1 टेक कंपनी थी। एप्पल टॉप 5 से बाहर थी।
- अब कहानी एकदम उलटी हो गई है। याहू टॉप 5 से बाहर और एप्पल नंबर 1 है। बता दें, 25 जुलाई तक एप्पल की मार्केट कैप 35.48 लाख करोड़ थी।

16 साल में 90% से ज्यादा घटी स्टॉक्स की कीमत
- जनवरी 2000 में याहू के एक स्टॉक की कीमत 500 डॉलर (तब के रुपए-डॉलर रेट के हिसाब से 23400 रुपए) थी।
- आज 26 जुलाई को कंपनी का एक स्टॉक आपको सिर्फ 38 डॉलर (करीब 2508 रुपए) में मिल जाएगा।
- पिछले 16 साल में स्टॉक प्राइस 90% से ज्यादा घट गया है। जानकार इसके पीछे याहू की लगातार की गई इन 6 गलतियों को कारण बता रहे हैं।
अब याहू सर्च और मेल पर होगा वेराइजन का कंट्रोल
- सौदे के तहत याहू के सर्च, मेल, फ्लिकर, टम्बलर, इंस्टेंट मैसेजिंग और एडवर्टाइजिंग टेक्नोलॉजी वेराइजन को मिलेंगे। इससे कंपनी के पास 25 ब्रांड हो जाएंगे।
- वेराइजन अमेरिका की सबसे बड़ी वायरलेस कम्युनिकेशन कंपनी है। इसकी ज्यादातर कमाई मोबाइल फोन सर्विस से ही आती है। इसने पिछले साल 29,000 करोड़ रुपए में ऑनलाइन कंपनी एओएल को खरीदा था। हफिंगटन पोस्ट, टेकक्रंच और एनगैजेट एओएल के ही प्रोडक्ट हैं।
- डील अगले साल पूरी होने की उम्मीद है।
- चीन की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा में याहू की हिस्सेदारी और याहू जापान इस सौदे में शामिल नहीं हैं।
- इन दोनों की मौजूदा मार्केट वैल्यू 41 अरब डॉलर (2.75 लाख करोड़ रुपए) है। अलीबाबा में इसकी करीब 15 फीसदी हिस्सेदारी है।
- याहू की मौजूदा मार्केट कैप 2.48 लाख करोड़ रुपए है। वहीं, वेराइजन की मार्केट कैप करीब 15.5 लाख करोड़ रुपए है।
याहू की ऐसी हालत क्यों
- 2000 के बाद इंटरनेट बिजनेस खास तौर से सोशल मीडिया और मोबाइल डिवाइसेज पर आधारित हो गया। याहू ने इस नई टेक्नोलॉजी को अपनाने में देरी की।
- अच्छे इंजीनियर हायर नहीं किए। हाल तक याहू खुद को टेक्नोलॉजी के बजाय मीडिया कंपनी समझती रही। गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियां इसी दौर में उभरीं।
कंपनी की हालत सुधारने के लिए लाया गया था नया सीईओ
- याहू की स्थापना 1994 में हुई थी। लेकिन हाल के वर्षों में इसकी माली हालत काफी खराब हो गई।
- कंपनी की हालत सुधारने के लिए मैरिसा मेयर को 2012 में सीईओ बनाया गया। लेकिन कंपनी की हालत में सुधार नहीं हुआ।
- उनके आने के बाद तीन साल में याहू का रेवेन्यू 45% गिर गया। जून तिमाही में इसे 3,000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ।
- कुछ महीने पहले सीईओ मेयर ने अपनी जॉब बचाने के लिए करीब 1700 इम्प्लॉइज को निकालने का प्लान भी बनाया था।
- याहू के टॉप एग्जीक्यूटिव में से कुछ जॉब छोड़ कर चले गए। इसके चलते शेयर होल्डर्स में काफी नाराजगी थी। सीईओ को हटाने तक की मांग की गई थी।
6 गलतियां, जिन्होंने याहू को बिकने पर किया मजबूर
गलती नंबर 1: दो बार मौका मिला फिर भी Google को नहीं खरीदना
- याहू के सामने गूगल को खरीदने के लिए 2 बार ऑफर आया था। दोनों ऑफर याहू ने ठुकरा दिए।
- गूगल ने पहला ऑफर 1997 में 3.92 करोड़ रुपए का रखा था। दूसरा ऑफर 2002 में 24100 करोड़ रुपए का था। 
- मना करने के पीछे कंपनी का तर्क था कि गूगल एक सर्च इंजन है। यहां लोग सीधे सवाल टाइप कर जवाब पाते हैं। जबकि याहू का विजन साइट पर डायरेक्ट रीडर्स को लाकर टाइम स्पेंट बढ़ाना है। अगर गूगल को खरीदेंगे तो टाइम स्पेंट घट जाएगा, जिससे याहू को रेवेन्यू लॉस होगा। 
- आज गूगल 34.12 लाख करोड़ की मार्केट कैप के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेक कंपनी है।

गलती नंबर 2: Facebook को खरीदने में चूक
- याहू को 2006 में फेसबुक खरीदने का मौका मिला। पहले याहू ने 100 करोड़ डॉलर का ऑफर दिया। इस पर फेसबुक चेयरमैन मार्क जुकरबर्ग लगभग रेडी हो गए थे।
- बाद में शेयर मार्केट गिरने के चलते याहू ने 100 करोड़ डॉलर के ऑफर को घटाकर 87.5 करोड़ डॉलर कर दिया। इससे नाराज होकर जुकरबर्ग डील से पीछे हट गए।
- आज एफबी की मार्केट कैप 23.24 लाख करोड़ रुपए है।

गलती नंबर 3: 2008 में माइक्रोसॉफ्ट के ऑफर को ठुकराना
- 2008 लास्ट तक 2000 के मुकाबले याहू की मार्केट कैप 86% घटकर 87185 करोड़ पहुंच गई। अकेले 2008 में कंपनी की मार्केट कैप करीब 88000 करोड़ रुपए घटी थी। 
- रेवेन्यू और सेल्स, दोनों लगातार गिरने से कंपनी की हालत खराब थी। तब 2008 में ही माइक्रोसॉफ्ट ने याहू को 2.23 लाख करोड़ में खरीदने का ऑफर दिया। 
- ये अमाउंट कंपनी की उस समय की मार्केट कैप से ज्यादा था। लेकिन तब याहू ने खुद को बड़ा प्लेयर बताते हुए ऑफर को ठुकरा दिया।

गलती नंबर 4: कन्फ्यूज रहना कि याहू टेक कंपनी या मीडिया कंपनी
- याहू की कमाई का बड़ा हिस्सा ऐड से आता था। इसके मुकाबले सॉफ्टवेयर से ज्यादा कमाई नहीं होती थी। 
- जबकि याहू ने अपने स्टाफ में सॉफ्टवेयर के ज्यादा स्टाफ रखे थे। साथ ही, यह एक टेक कंपनी की तरह काम करती थी। 
- याहू के डाटा साइंटिस्ट पॉल के मुताबिक, कंपनी हमेशा कन्फ्यूज रही कि वो एक मीडिया कंपनी है या टेक। इसके चलते कंपनी एक जगह फोकस नहीं कर पाई। कंपनी के लगातार फेल होने के पीछे का कारण यही कन्फ्यूजन है।

गलती नंबर 5: प्रोडक्ट को लेकर लिए गलत फैसले
- याहू ने 2005 में फोटो शेयरिंग प्रोडक्ट 'फ्लिकर' खरीदा। इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और एफबी से पहले यही प्रोडक्ट सोशल नेटवर्किंग के लिए चर्चा में था। 
- प्रोडक्ट क्लैरिटी नहीं होने के चलते याहू ने इसे इमेज शेयरिंग तक ही सीमित रखा और नए फीचर्स एड नहीं किए। ऐसे में बड़ा रेवेन्यू जनरेटर माना जाने वाला ये प्रोडक्ट भी फेल हो गया। 
- 2013 में 100 करोड़ डॉलर में याहू ने टम्बलर खरीदा था। डील होते ही इस माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर ऐड देना शुरू कर दिया। इससे यूजर काफी नाराज हुए और टम्बलर के यूजर्स कम होने लगे।

गलती नंबर 6: गूगल-एफबी की तरह स्मार्ट टेक्नोलॉजी पर ध्यान ना देना
- गूगल, एफबी, माइक्रोसॉफ्ट ने स्मार्ट टेक्नोलॉजी को अपनाते हुए हैकर सेंट्रिक बनाने पर ध्यान दिया। जबकि याहू इसमें पिछड़ गई।
- याहू की एक्स एचआर के मुताबिक, कंपनी का फोकस सेफ और स्मार्ट टेक्नोलॉजी की जगह ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्ट मैनेजर और डिजाइनर्स को हायर करने में था। वहीं, गूगल-एफबी जैसी कंपनियां दोनों को लेकर बैलेंस्ड थीं।

डील से क्या होगा वेराइजन को फायदा

- माना जा रहा है कि याहू को खरीदने के बाद वेराइजन को गूगल और फेसबुक से मुकाबले में मदद मिलेगी।
- 2015 में डिजिटल एडवर्टाइजिंग का बड़ा हिस्सा गूगल और फेसबुक के खाते में गया था।
- याहू के न्यूज, स्पोर्ट्स और फाइनेंस सुविधा के हर महीने एक अरब एक्टिव यूजर हैं। मोबाइल फोन पर एक्टिव यूजर की संख्या 60 करोड़ है। वेराइजन को इसका फायदा मिलेगा।

कभी अमेरिका की पावर गैलरी में रहती थीं Yahoo CEO Marisha.

- 1999 में Google की पहली महिला इंजीनियर बनने वाली मारिसा मायर वाइस प्रेसिडेंट पद तक पहुंचीं। एक समय गूगल का चेहरा मानी जाती थीं। 
- 2009 में शादी से पहले राष्ट्रपति ओबामा के सम्मान में डिनर पार्टी दी थी। - मशहूर ‘वोग’ पत्रिका ने उनके प्रोफाइल में लिखा था- पैसा, खूबसूरती, प्यार और बेहतरीन कैरियर - कोई ऐसी चीज है जो मारिसा के पास नहीं है? 
- 2011 में कई वीपी को सीनियर वीपी बनाया गया, पर मारिसा को प्रमोशन नहीं मिला। गूगल ने उनकी जिम्मेदारी भी कम कर दी। 
- साफ था कि गूगल में रहते वह सबसे शक्तिशाली सीईओ की सूची में नहीं आ सकती थीं। नई कंपनी खोलना और निवेशकों के सामने हाथ फैलाना भी उनकी फितरत में नहीं था। 
- 2012 में याहू से ऑफर मिला तो उन्होंने बेहतर मौका समझा। जिम्मेदारी तो थी याहू को फिर मुनाफे में लाने की, पर ऐसा हो न सका। याहू के ऑपरेटिंग बिजनेस के बिकने के बाद अब उनकी अगली जिम्मेदारी क्या होगी, अभी यह साफ नहीं है।
याहू टाइमलाइन
1994 - याहू की स्थापना हुई। पूरा नाम येट एनदर हायार्किकली ऑफिशियस ऑरेकल।
2000 – मार्केट कैप 5.63 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जो अब तक इसका अधिकतम है।
2002 – गूगल को 24,100 करोड़ रु. में खरीदने का ऑफर, लेकिन गूगल ने मना कर दिया।
2008 – माइक्रोसॉफ्ट ने 2.23 लाख करोड़ रु. में याहू को खरीदने का प्रस्ताव दिया, याहू ने मना कर दिया।
2013 – ब्लॉगिंग साइट टम्बलर को 7, 000 करोड़ रुपए में खरीदा।
2015 – याहू को 29, 000 करोड़ रुपए का भारी-भरकम घाटा हुआ।
2016 – Verizon 32, 000 करोड़ रु. में याहू खरीदने के लिए तैयार।


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