Sunday, December 27, 2009

एग्रो मोबाइल एप्लिकेशन यानी नैनो गणेश ने बदला जीवन


eअहमदाबाद से करीब 30 किलोमीटर पूर्व आणंद के सोजित्रा में किसानों की आम हलचल देखकर आपको आश्चर्य में पड़ने की जरूरत नहीं है। वे सेडान की सवारी करते हैं , दोमंजिला बंगले में रहते हैं , अपनी बाइक से घूमते - फिरते हैं और अपने परिवार को लेकर अहमदाबाद या वडोदरा के बिग बाजार में शॉपिंग करने जाते हैं। इतना ही नहीं शॉपिंग के बाद वे प्लास्टिक मनी से काउंटर पर भुगतान करते हैं। अगर आप उनसे सवाल करेंगे कि कैसे हैं , तो उनसे जवाब मिलेगा , मजे में।

दोपहर में गांव वालों की हलचलें देखते ही बनती हैं। सभी किसान भावेश पटेल के घर जुटे हुए हैं क्योंकि पटेल ने अपने नोकिया ई 75 से फोन कर यह जानने की कोशिश की कि क्या आज पानी आएगा ? एक ग्रामीण ने पूछा - क्या पानी आ रहा है ? हमें बताया गया कि किसान दस किलोमीटर दूर एक जलाशय से खेतों में पानी छोड़ जाने का इंतजार कर रहे हैं। पटेल ने कॉल पूरी करने के बाद मोबाइल फोन से ही खेत में लगा पंपसेट स्टार्ट कर दिया।
 
वे इसे दरअसल नैनो गणेश ( छोटा गणेश ) मानते हैं। इस मोबाइल फोन के आविष्कारक ने पहले इसका नाम गणेश रखा था , बाद में टाटा द्वारा नई लखटकिया कार लॉन्च करने के लिए साणंद के पास जगह के चयन की घोषणा के बाद इसका नाम नैनो गणेश रख दिया गया।

पुणे की ओसियान एग्रो ऑटोमेशन के संस्थापक संतोष ओस्टवाल कहते हैं , ' मुझे लगा कि हमारा उत्पाद पहले ही गुजरात में हिट हो चुका है और अगर हमने इसका नामकरण भी इस तरह कर दिया तो मांग में और इजाफा होगा। वाकई इसका बहुत असर पड़ा है। ' गुजरात , महाराष्ट्र , तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के किसानों की जिंदगी सिंचाई सुविधा के लिए इस आधुनिक गैजट ने पूरी तरह बदलकर रख दी है। इस समय करीब 7,000 किसान नैनो गणेश का प्रयोग कर रहे हैं। ओस्टवाल इसे अब उत्तरी भारत के किसानों तक पहुंचाना चाहते हैं और उन्हें उम्मीद है कि अगले दो साल में इसके उपभोक्ताओं की संख्या दो लाख से ऊपर पहुंच जाएगी।
 

नई तकनीक के इस्तेमाल बढ़ते क्रेज का श्रेय सस्ते टैरिफ और हैंडसेट की कम कीमतों को दिया जा सकता है। देश के गांवों तक मोबाइल फोन की पहुंच बढ़ रही है और ओस्टवाल इसका पूरा फायदा उठाने में जुटे हैं। इस उपकरण की यूएसपी इसका प्राइस टैग और इस्तेमाल में आसानी है। इसकी कीमत 600 रुपए से लेकर 2,500 रुपए है जो किसानों की पहुंच में है। अगर वे पहले से कोई मोबाइल यूज कर रहे हैं तो खर्च और कम हो जाता है। इस उपकरण का इस्तेमाल करने के लिए डिवाइस को पंप से कनेक्ट करना पड़ता है और मोबाइल या किसी फोन से दुनिया भर से कहीं से भी कॉल करके इसे शुरू किया जा सकता है।

इस तरह के उत्पाद विकसित करने का ख्याल ओस्टवाल को तब आया जब वे बचपन में अपने दादाजी के साथ संतरे के खेत में जाते थे। उस समय मोबाइल फोन का चलन नहीं था। उनके गांव में उस समय टीवी भी नहीं था और बिजली को भी विलासिता माना जाता था। ओस्टवाल के दादाजी रात में संतरे के खेतों में दूर तक निकल जाते थे। उनके हाथ में एक लैंप और माचिस की तीलियां होती थीं। वह कहते थे कि अगर रात में खेत में पानी नहीं दिया जाए तो सुबह संतरा तोड़ने पर उसकी गुणवत्ता सही नहीं होगी , जिससे उन्हें अच्छे पैसे नहीं मिलेंगे।

ओस्टवाल कहते हैं , ' दादाजी के पैर में एक बार इंफेक्शन हो गया और इस वजह से उन्हें एक पैर गंवाना पड़ा। इसके बाद मैं सोचने लगा कि क्या ऐसा कोई तरीका नहीं है , जिससे किसानों को फसल में पानी देने के लिए खेत में नहीं घुसना पड़े। ' इसके बाद ओस्टवाल ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और उन्हें टेल्को में नौकरी मिल गई। अस्सी के दशक में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपनी पुरानी योजना पर अमल करने में जुट गए। रिमोट कंट्रोल से संचालित होने वाले इस उपकरण को विकसित करने में उन्हें दस साल से अधिक लग गए। तब तक देश में सॉफ्टवेयर और मोबाइल फोन का बाजार जमने लगा था , हालांकि ग्रामीण भारत इसका इंतजार कर रहा था।

यह इंतजार गुजरात के सोजित्रा में खत्म हुआ। किसानों के खेत में पानी पहुंचने लगा और वे खुशी से गले मिलने लगे। इसके बाद उन्होंने बगल में खड़े ओस्टवाल का भी अभिवादन किया। इसके बाद क्या ? ओस्टवाल कहते हैं कि वह एक नए उत्पाद पर काम कर रहे हैं। पंप सेट चलाने के लिए उन्होंने जिस मॉडम का आविष्कार किया है , उसका उपयोग कई दूसरे कार्यों में भी किया जा सकता है। वह ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जिससे पानी की टंकी के ओवरफ्लो होने पर उसकी सूचना मोबाइल फोन पर मिल सकेगी। सेल फोन का वह एक नया एप्लिकेशन विकसित कर रहे हैं जिससे घर में आग लगने पर उसकी सूचना भी मोबाइल पर मिल सकेगी। फैक्ट्री में इस उपकरण के इस्तेमाल से ब्रेकडाउन की सूचना प्राप्त होगी और सिस्टम ऑपरेटर यह जान सकेंगे कि सर्वर रूम का एसी बंद हो गया है या नहीं।

ओस्टवाल के इस एप्लिकेशन की तारीफ दुनिया भर में हो रही है। मशहूर मोबाइल कंपनी नोकिया ने उन्हें 25 , 000 डॉलर का पुरस्कार दिया है और इस एप्लिकेशन को दुनिया भर में पहुंचाने का भरोसा भी। टाटा टेलीसर्विसेस ने ओस्टवाल से इस उपकरण को पूरे देश में उपलब्ध कराने के लिए समझौता किया है। इसके अलावा कई निवेशकों ने ओस्टवाल के उद्यम में निवेश की संभावना के बारे में पूछताछ की है।

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