Wednesday, December 23, 2009

गांव की हरियाली को अब मोबाइल का सहारा

सोशल नेटवर्किंग, पुश बटन ई-मेल, नेट सर्फिंग, एप्लिकेशन डाउनलोड, हाई पिक्सल फोटोग्राफी... मोबाइल पर हम कितना कुछ करने लगे हैं। लेकिन राजस्थान के बांसवाड़ा के पास गांव में रहने वाले किसान नित्यानंद सिंह का मोबाइल यूज थोड़ा डिफरेंट है। वह फोन पर गेम खेलने के बजाय मक्का के रेट पता करते हैं। गुजरात में दाहोद के पास रहने वाले आनंद भाई ने अपने फोन के लिए मेसेज पैक सब्सक्राइब किया है, जोक्स का नहीं बल्कि कपास की अच्छी उपज पाने का। मोबाइल फोन के विस्तार में अब शहरों का गिलास भर गया है और नेक्स्ट बिग ग्रोथ के लिए गांवों का रास्ता कुछ ऐसे ही खुलते दरवाजों से नजर आ रहा है।

हर राज्य के गांवों में किसानों के लिए बेहतर जिंदगी के नाम से वैल्यू एडेड सर्विसेज पेश कर रही कंपनी हैंडीगो ने अपने सॉल्युशंस 20 भाषाओं में पेश किए हैं। गेहूं, मक्का, मसालों, फलों, फिशरी समेत हर तरह के मसले पर यह कंपनी किसानों को आईवीआर के जरिए टिप्स पेश करती है। कंपनी की प्रमोशन मैनेजर नेहा त्यागी के मुताबिक देशभर में उनके करीब 5 लाख सब्सक्राइबर बन चुके हैं, जो फोन से न सिर्फ मंडी अपडेट लेते हैं बल्कि फसल पर एक्सपर्ट्स की राय और मौसम की जानकारी जैसी काम की बातें भी हासिल कर रहे हैं। मसलन बूंदी के पास गांव में रहने वाली जमना बाई जब अपनी फसल के लिए सही कीटनाशक चुनने पर अटक गईं तो उन्होंने मोबाइल का नंबर खटकाया और जवाब खोज निकाला।

हैंडीगो ने एयरटेल नेटवर्क पर उपलब्ध इस सर्विस के लिए पंतनगर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी समेत कई एग्रीकल्चर संस्थानों के एक्सपर्ट्स के साथ हाथ मिलाया है। नोकिया ने भी देशभर में नोकिया लाइफ टूल्स के नाम से खास गांवों के लिए अपनी सर्विस पेश की थी, जिसमें मेसेज भेजकर किसानों को काम के टिप्स दिए जाते हैं। इसके लिए महाराष्ट्र एग्रीकल्चर बोर्ड, भारतीय मौसम विभाग, रॉयटर्स मार्केट लाइट जैसे संस्थानों के साथ करार कर किसानों को फसल, मौसम और रेट्स जैसी जरूरी जानकारी भेजी जाती है। साथ ही इसमें अंग्रेजी सीखने जैसी सुविधाएं भी पेश की गईं हैं। नोकिया के हेड इमर्जिंग मार्केट्स बी. वी. नातेश बताते हैं कि नोकिया माइक्रोफाइनैंस संस्थानों के साथ मिलकर कम इनकम वाले लोगों को साप्ताहिक किश्त पर फोन खरीदने के ऑप्शन दे रही है।

पिछले दिनों नोकिया ने आईटीसी के साथ मिलकर किसानों के लिए पर्सनलाइज्ड सर्विस भी पेश की, जिसमें आईटीसी चौपाल के 6500 सेंटर किसानों की जरूरत के हिसाब से इन्फो अपडेट देंगे। आईटीसी एग्री बिजनेस के चीफ एग्जिक्यूटिव एस. शिवकुमार के मुताबिक लोकल लैंग्वेज में नोकिया लाइफ टूल्स का उपलब्ध होना और आईटीसी की लोकलाइज्ड जानकारी किसानों के लिए काम की साबित होगी।

नोकिया की सर्विस मेसेज आधारित है। हैंडीगो की नेहा त्यागी कहती हैं कि कई किसानों के लिए फोन पर मेसेज से जानकारी लेना या कॉल सेंटर पर कॉल करना थोड़ा कॉम्पिलिकेटेड काम हो सकता है, ऐसे में आईवीआर सॉल्यूशंस काफी काम के साबित हुए हैं। उनके मुताबिक बेहतर जिंदगी अभी एयरटेल नेटवर्क पर है लेकिन इसे बाकी मोबाइल नेटवर्क पर भी लाने की तैयारी है, और प्लान इस सर्विस को टोल फ्री बनाने का है। हैंडीगो पर सबसे ज्यादा जानकारी फसल और लाइव स्टॉक के बारे में ली जाती है और जिन इलाकों में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है, उनमें मछुआरा बहुल तटीय राज्य, यूपी, बिहार और गुजरात शामिल हैं।

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