Saturday, November 21, 2009

किसी भी हाल में न छोड़िये दृढ़ता का दामन

दृढ़ता स्व अनुशासन का पांचवां और आखिरी स्तंभ होता है। आखिर दृढ़ता क्या है? दृढ़ता का अर्थ उस क्षमता से है जो अपनी निर्णय पर अड़िग रहना है, चाहे आपकी भावनाएं कुछ भी हो। संभव है कि आपको उस समय अपनी भावनाएं दबानी पड़ जाए जब आपको लगे कि अब यह कार्य छोड़ देना चाहिए। जब आप किसी बड़े लक्ष्य के लिए कार्य करते हैं तो आपकी प्रेरणा आपके लिए एक ऊर्जा का कार्य करती है। कई बार आप प्रेरित होते हैं तो कई बार प्रेरित नहीं होते हैं पर आपकी प्रेरणा परिणाम नहीं देती है। यह आपके कार्य हैं जो आपको परिणाम दिलाते हैं।


दृढ़ता आपको वह ऊर्जा देती है जिसे प्रेरणा न मिलने पर भी आप कार्य करने के लिए मजबूर होते हैं। दृढ़ता आपको एक प्रेरणा देने का कार्य भी करती है। यदि आप लगातार कदम उठाते रहेंगे तो आपको परिणाम भी मिलते रहेंगे। उदाहरण के लिए आप डाइटिंग और एक्सरसाइज के लिए और प्रोत्साहित होंगे, यदि आप शुरू के 10 पाउंड कम कर लेते हैं। आपको लगेगा कि कपड़े पहले से ज्यादा फिट हैं। यह आपको आगे एक्सरसाइज करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

दूसरा सवाल उठता है कि क्या हमेशा दृढ़ता बनी रहनी चाहिए या कुछ परिस्थितियों में इसे छोड़ देना चाहिए? जी हां, दृढ़ता हमेशा ठीक नहीं। कभी-कभी दृढ़ता को छोड़ देना भी ज्यादा उपयुक्त होता है। क्या आपने कभी ट्रेफ ओ डाटा कंपनी का नाम सुना है? क्या आप माइक्रोसाफ्ट के बारे में जानते हैं? यह दोनों कंपनियां बिल गेट और पॉल एलन ने शुरू की थी। ट्रेफ ओ डाटा पहली कंपनी थी जो दोनों ने 1972 में शुरू की थी। इस कंपनी को दोनों ने काफी सालों तक चलाया। बाद में उन्होंने कंपनी को बंद कर दिया। इसके बाद माइक्रोसाफ्ट की शुरूआत हुई। यदि वह पुरानी कंपनी को नहीं छोड़ते तो संभव है कि माइक्रोसाफ्ट और बिल गेट्स को लेकर इतने सारे चुटकुलों का कलेक्शन तैयार नहीं हो पाता।

ऐसे में कब दृढ़ता ठीक है और कब दृढ़ता छोड़ देनी चाहिए? आपको सोचना होगा कि आपका प्लान ठीक है। यदि नहीं तो इसे ठीक करिए। क्या आपका लक्ष्य ठीक है? यदि नहीं तो इसे अपडेट करिए या संशोधित करिए। आपको ऐसे लक्ष्य के लिए कार्य नहीं करना चाहिए जो आपको प्रेरित नहीं करता हो। दृढ़ता का अर्थ जिद्दीपन नहीं होना चाहिए। दृढ़ता और जिद्दीपन को जानना मेरे लिए एक कठिन अध्याय था। मैं पहले मानता था कि एक बार लक्ष्य तय करने के बाद इसे नहीं छोड़ना चाहिए। बाद में मुझे पता चला कि यह ठीक नहीं है। यदि आप एक मनुष्य के रूप में खुद को विकसित कर रहे हैं तो आप हर साल एक अलग व्यक्तित्व के साथ होंगे। यदि आप व्यक्तिगत विकास कर रहे हैं तो परिवर्तन ज्यादा तेज होंगे। संभव है कि आपने जो लक्ष्य आज तय किए हैं वह कल आपके लिए जरूरी न हों।

यदि आपको नए लक्ष्य बनाने हैं तो अपने पुराने लक्ष्यों को बदलना होगा। कभी नए लक्ष्य इतने उत्साहजनक होते हैं जो पुराने लक्ष्यों के लिए कार्य करने को वक्त ही नहीं दे पाते हैं।

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