Monday, November 16, 2009

हथेली है या कैल्कुलेटर?...ये है सिक्स्थ सेंस


मिस्टर इंडिया जैसी फिल्मों में आपने कई ऐसे सीन्स देखे होंगे जहां हर चीज़ का कंट्रोल ऐसे हाथ में रहता है जिसे आप देख नहीं सकते या फिर किसी चीज को छूने भर से नतीजा किसी जादू समान लगता है। लेकिन, अगर हम ये कहें कि अब ये सब कुछ भूत नहीं बल्कि आप खुच कर सकते हैं तो कैसा हो?

वीयरेबल कंप्यूटिंग यानी..कुछ ऐसा कि कंप्यूटिंग डिवाइस को आप अपने कपड़ों की तरह पहन पाएंगे। अगर आपको कभी भी ये शक हुआ हो कि सिक्थ सेंस कोई सुपरनैचुरल साइंस-फिक्शन ड्रीम है तो चलिए साइंटिफिक सिक्स्थ सेंस पर नज़र डाल तेते हैं।

हम आपको मिलवाएंगे डब की हुई सिक्स्थ सेंस से....एक ऐसी टेक्नॉलजी जो आपकी कलाई को घड़ी और हथेली को फोन में बदल देने का वादा करती है। इतना ही नहीं, आपके ग्रॉसरी स्टोर में घुसने पर ये टेक्नॉलजी आपके लिए बेहतर सोदा तलाशेगी...प्राइस कंपेरिज़न के ज़रिए।

यकीन मानिए हमारा पाला किसी भूत से नहीं पड़ने वाला...ये सौ फीसदी हकीकत है। आइए इस टेक्नॉलजी को और बारीकी से जानें...

शरीर के अंदर नहीं अब पहनिए सिक्स्थ सेंस

साधारण शब्दों में कहें तो ये एक ऐसा हाइ-टेक डिवाइस है जिसे आप कपड़ों की तरह पहने सकते हैं। ये डिवाइस इंटरनेट की इन्फॉर्मेशन आप तक पहुंचाएगा। लेकिन कैसे?

इस डिवाइस का स्मार्टफोन इन्फॉर्मेशन को रिट्रीव करने के लिए इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करता है। इस डिवाइस का डिजिटल प्रपोटोटाइप किसी भी सरफेस को कम्प्यूटिंग के लिए टचस्क्रीन इंटरफेस बना देगा, जिसे आप हाथों के आसान जेस्चर्स (gestures) के ज़रिए कंट्रोल कर पाएंगे।

इस डिवाइस के ज़रिए सरफेसेस पर, दीवारों पर और हमारे आसपास के सामानों पर इन्फॉर्मेशन प्रोजेक्ट की जा सकती है। और इन जानकारियों के साथ हम अपने हाथों के नैचुरल मूवमेंट्स और जेस्चर्स के सहारे इन्टरेक्ट कर सकते हैं। इसके लिए हमें उस ऑब्जेक्ट से इन्टरेक्ट करना होगा।

देसी कनेक्शन

लेकिन, इस अनोखी टेक्नॉलजी के पीछे किसका दिमाग है। कनेक्शन देसी है। भारत में ही जन्मे 28 साल के प्रणव मिस्त्री वो रिसर्चर हैं जिन्होंने इस नायाब डिवाइस को तैयार किया है। प्रणव मसाचुट्टस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी(MIT) के मीडिया लैब में रिसर्चर हैं।

गुजरात में जन्मे मिस्त्री ने कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में आईआईटी बॉम्बे से डिज़ाइन में मास्टर्स डिग्री हासिल की। मिस्त्री(और एमआईटी मीडिया लैब के उनके मेंटर पेट्टी मैस) ने हाल ही में अममेरिका की T.E.D कॉन्फ्रेंस में "सिक्स्थ सेंस" का डिमॉन्ट्रेशन किया। और मिस्त्री की इस टेक्नॉलजी ने पूरे T.E.D में हड़कम्प मचा कर रख दिया।

हार्डवीयर की हार्डवेयर स्टोरी


सिक्स्थ सेंस को अंतिम रूप देने के लिए ढेरों इनवेंशन्स का सहारा लिया गया। इस डिवाइस ने गैजेटरी के ऐसे नए एक्सपीरिएंस के लिए जगह बनाई है कि आईफोन बहुत पुरानी बात लगने लगेगा। इस डिवाइस में वीयरेबल कैमरा, एक प्रोजेक्टर, एक मिरर जहां कैमरा आपकी उंगलियों की मूवमेंट्स को पहचानेगा और कमांड में ट्रांसलेट करेगा।

सबसे बड़ी बात ये कि आपको महसूस भी नहीं होगा कि आपने कोई इस तरह का डिवाइस पहन रखा है। इन सारे हार्डवेयर कंपोनेंट्स को एक वीयरेबल पेंडेन्ट की तरह के डिवाइस में फिट किया गया है।

कैसे काम करता है ये डिवाइस?

यूज़र को पॉकेट में एक मोबाइल कंप्यूटिंग डिवाइस रखना होगा जिससे कैमरा और प्रोजेक्टर कनेक्टेड होंगे। प्रोजेक्टर सरफएस, दीवारों और फिज़िकल ऑब्जेक्ट्स को बतौर इन्टरफेस ट्रीट करते हुए उनपर विजुअल इन्फॉर्मेशन को प्रोजेक्ट करता है। जबकि, कैमरा कंप्यूटर-विज़न पर आधारित टेक्नीक्स के ज़रिए यूज़र के हाथों की मूवमेंट और जेस्चर को ट्रेक करता है।

इसलिए यूज़र को इंडेक्स फिंगर और अंगूठे में कलर-कोडेड ग्लव्स(दस्ताने) पहने की जरूरत होगी ताकि यूज़र के हाथों की मूवमेंट्स और जेस्चर्स को रिकॉर्ड कर उन्हें डीक्रिप्ट किया जा सके।

क्या-क्या हो सकती हैं इस टेक की एप्लिकेशन्स?

सिक्स्थ-सेंस की ढेरों एप्लिकेशन्स हो सकती हैं। अपनी साइट पर मिस्त्री ने कुछ को लिस्ट किया है। मैप एप्लिकेशन के ज़रिए यूज़र आसपास के किसी सरफेस पर डिस्प्ले किए गए मैप को हैंड-जेस्चर्स के ज़रिए नेविगेट कर सकता है। इस टेक के ज़रिए जूम इन-ज़मू आउट भी किया जा सकता है। इसके अलावा, ड्रॉइंग एप्लिकेशन के ज़रिए इंडेक्स फिंगर की फिंगरटिप मूवमेंट्स को ट्रैक कर यूज़र किसी सरफेस पर ड्रॉ कर सकता है।

इसी तरह से स्क्वेयर-फ्रेम जेस्चर ट्रेक करने का मतलब है कि डिवाइस फोटो क्लिक करेगा। यानी न्यूज़पेपर्स इस डिवाइस को न्यूज़ विडियो क्लिप की तलाश के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

17,000 रुपये में मिलेगी सिक्स्थ सेंस

ये डिवाइस कितना पॉपुलर होगा इसका पता तो कंपनियों के रिस्पॉन्स के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एचपी और सैमसंग जैसे कॉरपोरेट्स इस डिवाइस का मूल्यांकन कर रहे हैं। मिस्त्री के मुताबिक, कुछ छोटी भारतीय कंपनियां भी इस प्रोजेक्ट में इंटरेस्ट दिखा रही हैं। नमें हैदराबाद की कुछ फार्मा कंपनियां प्रमुख हैं।

जहां तक इस डिवाइस को तैयार करने पर आने वाली लागत का सवाल है तो इसे तैयार करने में लगभग 350 डॉलर का खर्च आएगा..यानी करीब 17,000 रुपये। हालांकि, मिस्त्री का कहना है कि भारत के लिए उनका योजना इसे सस्ते में तैयार करने की है।

TED, इंडिया में अपनी पहली कॉन्फ्रेंस मैसूर में इंफोसिस कैंपस में 4 से 7 नवंबर के बीच करने की योजना बना रहा है।

No comments: