Sunday, September 13, 2009

प्राथमिकता दें स्वरोजगार को -हरीश बिजूर

खचाखच भरे कॉलेज सभागार में दोनों वक्ताओं ने विद्यार्थियों को बताया कि शिक्षा खत्म हो जाने के बाद उन्हें नौकरी की तलाश या खुद का कारोबार शुरू करने के दौरान किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और उनसे कैसे निपटा जाए। प्रेजेंटेशन के बाद आयोजित प्रश्नोत्तरी सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने जिज्ञासाओं का समाधान किया। इसके पहले सीएमडी स्वप्निल कोठारी ने रोचक ढंग से उद्यमिता को परिभाषित किया। व्याख्यान के अंत में एलीक के भीतर का रंगकर्मी मंच पर मुखर हुआ और छोटे से कथानक के जरिये ढेर सारी बात कह गए। तमाम लोग खुद को खड़े होकर देर तक तालियां बजाने से रोक नहीं सके।


जाने-माने ब्रांड मैनेजर और कारोबारी हरीश ने युवाओं को खुद का कारोबार शुरू करने की सलाह दी। उन्होंने कहा देश की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर का बोलबाला है। नए कारोबारियों के लिए काफी अवसर हैं। ऐसा करके वे अपने साथ अन्य लोगों का भी भविष्य संवारेंगे। मौजूदा बाजार व्यवस्था में सभी लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मार्केटिंग से जुड़े हुए हैं या उससे प्रभावित होते हैं। हम उन्हें दरकिनार करके नहीं रह सकते।
 
ब्रांडिंग के सात फंडे - बिजूर ने ब्रांडिंग के क्षेत्र में अपने ४७ सिद्घांतों में से सात विद्यार्थियों के साथ बांटे जो किसी ब्रांड को सफल बनाने के लिए आवश्यक हैं।
 
1. मार्केट रिसर्च से जुड़े लोग, उपभोक्ताओं की रोज बदलती जरूरतों के साथ तादात्म्य नहीं बैठा पा रहे हैं।



2. वे मार्केटिंग के घोषित सिद्घांतों से इतर व्यवहार करते हैं जो उपभोक्ताओं को आकर्षित नहीं कर पाते।


3. कई उपभोक्ता चीजों को इस्तेमाल करके देखना चाहते हैं। उनके लिए उचित प्लेटफॉर्म नहीं है। वे संभावित ग्राहक हैं।


4. ऐसी ब्रांडिंग हो, जो संभावित उपभोक्ता की संवेदनाओं से जुड़े।

5. नए उत्पादों के लिए बाजार तैयार करने में असफल हैं।


6. मार्केटिंग लक्ष्य से भटक रही है और कई बार मूखर्तापूर्ण विज्ञापन रचे जा रहे हैं।


7. खराब सेवाओं के कारण भी लोग ब्रांड बदल लेते हैं।



रचनात्मकता व उपयोगिता विज्ञापन की जान -पदमसी

विज्ञापन जगत में अपनी रचनात्मक सफलता के लिए एडगुरु के नाम से मशहूर एलीक पदमसी ने अपना लेक्चर विज्ञापनों पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में विज्ञापनों का अस्तित्व तभी तक है जब तक वे किसी उत्पाद के लिए मांग तैयार करने में सक्षम हैं।

पदमसी ने कहा कि श्रेष्ठ विज्ञापन वह नहीं है जिसे किसी समारोह में पुरस्कृत किया जाए, बल्कि वह है जो अधिक से अधिक संख्या में ग्राहकों को अपने साथ जोड़ सके और उन्हें उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित कर सके। उन्होंने कहा घर-घर पहुंच चुके टेलीविजन ने विज्ञापनों की पहुंच को व्यापक बना दिया है। महज १क् सेकंड में किसी बात को करोड़ों लोगों तक पहुंचाया जा सकता है, वह भी सजीव चित्रों के साथ।

ब्रांडवरटाइजिंग- उन्होंने कहा नए कारोबारी के लिए ब्रांडिंग व एडवरटाइजिंग जरूरी है। इससे एक जैसे सामान से भरे बाजार में नई चीज स्थापित करते हैं।



ब्रांड नेम- ब्रांड अलग पहचान कायम करता है। कोई बड़ा समूह मामूली चीज भी बाजार में उतारता है तो उसकी ब्रांड वैल्यू बगैर किसी विज्ञापन के ही काफी होती है क्योंकि पहले आए प्राडक्ट्स की प्रतिष्ठा होती है। भारत की ५क् फीसदी से अधिक आबादी २५ वर्ष से कम आयु की है। युवा कारोबार के क्षेत्र में आगे आएं।

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